Monday, November 26, 2018

राहुल का गोत्र बताने के पीछे कांग्रेस का ब्राह्मण कार्ड, राजस्थान में होगी वापसी?

राजस्थान की राजनीति में ब्राह्मण नेताओं का एक लंबे समय तक दबदबा रहा है. प्रदेश में कभी कांग्रेस की राजनीतिक धुरी ब्राह्मणों के इर्द-गिर्द घूमती थी, लेकिन वक्त के साथ कमजोर हुई. ऐसे में कांग्रेस ने एक बार फिर अपने परंपरागत मतदाताओं को साधने की रणनीति बनाई है. यही वजह है कि सीपी जोशी जहां खुले तौर पर ब्राह्मणों को राजनीति का सिरमौर मानते हैं. वहीं, राहुल ने भी अपनी जाति के बहाने ब्राह्मण कार्ड का दांव चला है.

विधानसभा चुनाव की जंग फतह करने उतरे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को पुष्कर की ब्रह्मा मंदिर में विधिवत पूजा की. इस दौरान राहुल ने अपना गोत्र उजागर किया. पुष्कर में राहुल गांधी ने कौल ब्राह्मण और दत्तात्रेय गोत्र के नाम से पूजा की. राहुल के पहले कांग्रेस नेता सीपी जोशी ने ब्राह्मण जाति का दांव चला. कुछ दिनों पहले ही एक जनसभा में सीपी जोशी ने कहा था, 'उमा भारती जी की जाति मालूम है किसी को? ऋतंभरा की जाति मालूम है? इस देश में धर्म के बारे में कोई जानता है तो पंडित जानते हैं.' ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस का ब्राह्मण कार्ड क्या राज्य की सत्ता में वापसी की राह आसान करेगा?

30 सीटों पर ब्राह्मणों का प्रभाव

राजस्थान में कांग्रेस के पास ब्राह्मण चेहरे के तौर पर सीपी जोशी, गिरिजा व्यास और रघु शर्मा जैसे बड़े चेहरे हैं. प्रदेश में 8 पर्सेंट वोट ब्राह्मण समाज का है. प्रदेश की करीब 30 विधानसभा सीटों पर ब्राह्मण वोटर निर्णायक भूमिका में है. कांग्रेस ने राजस्थान में पार्टी प्रभारी की कमान अविनाश पांडेय के हाथों में है. इसके अलावा प्रदेश में कांग्रेस के चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष भी ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखने वाले रघु शर्मा हैं.

आजादी के बाद कांग्रेस के 5 ब्राह्मण सीएम

आजादी के बाद से लेकर 90 के दशक तक राजस्थान कांग्रेस में ब्राह्मण नेताओं का सुनहरा दौर रहा था. आजादी के बाद से लेकर 1990 तक पांच ब्राह्मण मुख्यमंत्री बने थे. 1949 से लेकर 1990 तक राजस्थान की राजनीति में ब्राह्मण नेताओं का दबदबा रहा. 1990 में हरिदेव जोशी आखिरी सीएम थे और उसके बाद से लगातार राजस्थान की राजनीति में ब्राह्मणों का दबदबा कम हुआ है.

हालांकि, राज्य में कांग्रेस के सबसे प्रमुख चेहरे के तौर पर पार्टी महासचिव अशोक गहलोत और सचिन पायलट की होती है. ये दोनों चेहरे ब्राह्मण समुदाय से नहीं आते हैं.  यही वजह रही गहलोत को एक कार्यक्रम में कहना पड़ा कि राजस्थान में सीएम के लिए कांग्रेस के दो ही नहीं बल्कि पांच चेहरे और भी हैं. इनमें उन्होंने तीन ब्राह्मण चेहरों के नाम गिनाए.

ब्राह्मणों पर दांव

राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों में टिकट की अगर बात की जाए तो कांग्रेस ने ब्राह्मण समाज से 20 लोगों को इस बार उम्मीदवार बनाया है. जबकि पिछले चुनाव में ब्राह्मण समुदाय को 17 टिकट दिए गए थे और लोकसभा में एक भी नहीं था. हालांकि, उपचुनाव में कांग्रेस ने अजमेर लोकसभा सीट पर रघु शर्मा को उम्मीदवार बनाया था और उन्होंने जीत हासिल कर पार्टी का खाता खोला है. कांग्रेस ने इस बार फिर ब्राह्मण दांव चला है.

बता दें कि 1990 के बाद से लगातार राजस्थान की राजनीति में ब्राह्मण जाति का दबदबा कम होता आया है. हालांकि समय-समय पर राजस्थान में अलग-अलग ब्राह्मण नेता अहम पदों पर रहे हैं. लेकिन फिर भी 1990 के बाद से कोई भी मुख्यमंत्री के पद पर नहीं पहुंच पाया है.

राजस्थान के प्रमुख ब्राह्मण नेताओं की बात करें तो हरिदेव जोशी के बाद नवल किशोर शर्मा एक महत्वपूर्ण नाम रहे. हालांकि नवल किशोर शर्मा ने केंद्र की राजनीति में अपनी भूमिका अदा की.

कांग्रेस के ब्राह्मण चेहरे

इसके बाद वर्तमान राजनीति में सीपी जोशी, गिरिजा व्यास, रघु शर्मा, महेश जोशी, भंवरलाल शर्मा जैसे ब्राह्मण नेता अपना असर छोड़ते रहे हैं. अजमेर लोकसभा के उपचुनाव में रघु शर्मा को मिली जीत बताती है की राजस्थान में अब भी ब्राह्मण राजनीति के लिए पर्याप्त स्पेस बाकी है. जातिगत समीकरणों को आधार बनाकर टिकट दिए जाते हैं तो लंबे समय तक ब्राह्मण समाज को नजरअंदाज करना संभव नहीं है.

Wednesday, November 7, 2018

शेयर बाजार में दिवाली पर शाम 5.30 से 6.30 बजे तक होगी मुहूर्त ट्रेडिंग

शेयर बाजार में दिवाली के मौके पर 7 नवंबर को शाम 5.30 बजे से 6.30 बजे तक मुहूर्त ट्रेडिंग होगी। इस एक घंटे में अरबों रुपए का कारोबार होगा। दिवाली की शाम जब लोग त्योहार की तैयारी करते हैं, उस वक्त निवेशक और शेयर बाजार के कारोबारी एक खास वक्त पर बाजार में पैसा लगाते हैं। इस दौरान मुनाफे और रकम निकालने की चिंता नहीं की जाती। बल्कि, वर्षों पुरानी परंपरा को पूरा किया जाता है।

शुभ समय में निवेश की परंपरा है मुहूर्त ट्रेडिंग
हर दिन हजारों करोड़ रुपए का कारोबार करने वाले शेयर बाजार ने मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा को सहेज कर रखा है। दिवाली के इस दिन वैसे तो शेयर बाजार बंद रहता है लेकिन, एक घंटे की मुहूर्त ट्रेडिंग होती है। इस दौरान निवेशक कुछ खरीदारी कर परंपरा को निभाते हैं।

दिवाली के साथ नए साल की शुरुआत भी होती है। इस बार दिवाली के साथ संवत् 2075 शुरू हो रहा है। भारतीय परंपरा के अनुसार देश के कई हिस्सों में दिवाली के साथ ही नए वित्त वर्ष की शुरुआत भी होती है। इसीलिए मुहूर्त ट्रेडिंग की जाती है। इसके जरिए निवेशक नए फाइनेंशियल ईयर के अच्छे रहने की कामना करते हैं।

मुहूर्त ट्रेडिंग में बाजार ज्यादातर समय बढ़त में रहता है
इस दौरान प्रतीकात्मक निवेश के तौर पर ज्यादातर लोग पहला ऑर्डर खरीद का लगाते हैं। इसलिए बाजार में बढ़त देखने को मिलती है। पिछले सालों में मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान शेयर बाजार में दायरे में कारोबार हुआ

बोलते हुए इमोशनल हो गईं कैटरीना : शाहरुख को बबिता कुमारी (कैटरीना कैफ) का किरदार पसंद है, जो एक शराबी एक्ट्रेस है। अनुष्का को बउआ सिंह (शाहरुख खान) का किरदार पसंद है, जो बड़े-बड़े सपने देखने वाला मेरठ का एक बौना है। तो वहीं, जब बारी कैटरीना की आई तो उन्होंने कहा कि स्क्रिप्ट देखने के बाद वे आफिया युसुफजई भिंडेर (अनुष्का शर्मा) का किरदार करना चाहती थीं। लेकिन उन्हें यह रोल मिला नहीं।

डायरेक्टर ने भी माना : शाहरुख ने कैट की टांग खींची और कहा - तो क्या उन्हें अपना किरदार पसंद नहीं है। इस पर कटरीना बोलीं- मुझे बबिता का किरदार पसंद है, लेकिन आफिया के किरदार से मुझे प्यार है। इतना कहते-कहते कटरीना इमोशनल हो गईं और बोलीं कि वे इस रोल के लिए डायरेक्टर आनंद एल राय के सामने रो पड़ी थीं। आनंद ने भी इस बात की पुष्टि की- हां कटरीना आफिया का रोल करना चाहती थीं।

फिल्म जीरो का ट्रेलर रिलीज होने के बाद अनुष्का शर्मा की जमकर तारीफ हो रही है। कई दर्शकों ने तो उनके किरदार को शाहरुख से भी ज्यादा पसंद किया है। कैटरीना कैफ को इस बात का अंदाजा पहले से था तभी तो वे अनुष्का वाला किरदार पाने के लिए डायरेक्टर के सामने गिड़गिड़ा रही थीं। खुद कैटरीना ने यह खुलासा रेड चिलीज एंटरटेनमेंट के स्पेशल सेगमेंट 'जीरो का सच' में किया है। 

Monday, November 5, 2018

यहां जानें पूजन का शुभ मुहूर्त और विधि

आज नरक चतुर्दशी (Naraka Chaturdashi) यानी छोटी दिवाली (Diwali 2018) है. धनतेरस के दूसरे दिन और दीपावली के एक दिन पहले छोटी दीवाली यानी कि नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है.  दिवाली के एक दिन पहले आने वाले इस त्योहार के दिन दीप दान किए जाते हैं.

इस दिन घर के द्वार पर दीपक जलाए जाते हैं. इसलिए इसे छोटी दिवाली कहा जाता है. छोटी दिवाली के दिन यम देवता की पूजा की जाती है. मान्यता है कि यम देवता की पूजा करके लोग अपने परिवार वालों के लिए नरक निर्वाण की कामना करते हैं. आइए जानें इस दिन किस तरह पूजा की जाती है.

Naraka Chaturdashi: जानें क्यों जलाए जाते हैं इस दिन दीपक?
जानें, पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या है?


इस बार पूजा के लिए तीन शुभ मुहूर्त हैं...


सुबह:  9 बजकर 32 मिनट से 11 बजकर 45 मिनट तक.

दोपहर: 12  बजकर 05 मिनट से 1 बजकर 22 मिनट तक.

शाम: 5 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर  05 मिनट तक.


नरक चतुर्दशी पूजन-

नरक चतुर्दशी पर सुबह तेल लगाकर चिचड़ी की पत्तियां(चिचड़ी- चमत्कारी पौधा) पानी में डालकर स्नान करने से नरक से मुक्ति मिलती है. इस मौके पर 'दरिद्रता जा लक्ष्मी आ' कह घर की महिलाएं घर से गंदगी को घर से बाहर निकालती हैं.

नरक चतुर्दशी पूजन-विधि

- इस दिन सुबह उठकर सबसे पहले नहा धोकर सूर्य भगवान को अर्घ्य दें और संभव हो तो तिल का तेल लगाने के बाद नहाएं.

- इस दिन शरीर पर चंदन का लेप लगाकर नहाने और भगवान कृष्ण की उपासना करने का भी विधान है.

- शाम के समय घर की दहलीज पर दीप जलाएं और यम देव की पूजा करें.

- नरक चौदस के दिन भगवान हनुमान की पूजा भी की जाती है.